उठा ले शस्त्र
उठा ले शस्त्र अब तूं देखता है क्या ? दिखा दे भेद उनका अब तूं सोचता है क्या ? छोड़ सत्य को आज जो हुए हैं बहुतेरे मोह कर न उनका जो ख…
उठा ले शस्त्र अब तूं देखता है क्या ? दिखा दे भेद उनका अब तूं सोचता है क्या ? छोड़ सत्य को आज जो हुए हैं बहुतेरे मोह कर न उनका जो ख…
15-07-2006 था पतला दुबला वह योद्धा, नही रखता तरकस तीर कमान। वाणी से सत्य निष्ठ था वो, सादा जीवन उसकी पहचान। पतली धोती आंख पर चश्म…
(2005) राहों की परवा क्या करना वे तो मंजिलों की हमसफर हैं रास्ते तो बन जाते हैं लोगों के चलने से किस्तियाँ रूकती नहीं बिना मंजिल…
हरबार (sep.2020) गिरता हूं गहरा हरबार पिछली बार से ज्यादा हरबार उठता हूँ दुगना जो किया है खुद से वादा सर्पीली राहों पर मै बहता जा…
(2003) कसूर क्या उन काँटों का जो मुझको चुभते हैं राह जब मैंने यही चुना तो फिर,किस बात का गम है ? मै भी हूँ बड़ा कातिल जो मसला था ब…
राहों पे चलते-चलते (2002) राहों पे चलते-चलते खो गया मै कहीं सपनों की लहरों में बह गया मै कहीं खोकर पहचान अपनी रह गया गया मै अकेला…
सुख,सेवा और लोकप्रियता (2005) मै ढूढरहा हूँ सुख कागज के नोटों में मै देख रहा हूँ लोकप्रियता अख़बारों के पन्नों मे और सिनेमा के पर्…
तुक्ष कणमै लिख रहा हूँ एक कविता कागज के पन्नों पर नहीं समाजिक सिलाम्पट्ट पर जो डालेगा नहीं प्रकाश बुराइयों पर ओ दिखलाएगा नही बेमत…
हादसा तूं हंसी है एक परी की तरह, तुझे चाहाँ है देवी की तरह, तेरे होंठों की रंगत है मेरी चाहत, तेरे जुल्फों के छांव में मिलती है र…
बिता पल 1 भूत की बात जब मै थी, वो था, हमारे बीच कोई था, तो वह था – प्यार भरी चाहत | मिलने की आस थी एकांत भी पास थी मृदुल बातें सप…
१- सड़क पर जाते हुए अचानक मेरे हृदय में एक लहर सी दौड़ी | उसकी नजरें देख रही थी मुझे | मै भी सहमा हुआ, कभी देखूं उसे, कभी अपने पर…
छू ले देवत्व को पा ले अमरत्व को जीवन की पूर्णता मे मिटा दे अपनत्व को जीवन का सार क्या लक्ष्यों की प्राप्ति बस संघर्ष के आधार मे अ…