Saturday, 29 Aug 2026
कविता संग्रह

सत्य का सिपाही

15-07-2006 था पतला दुबला वह योद्धा, नही रखता तरकस तीर कमान। वाणी से सत्य निष्ठ था वो, सादा जीवन उसकी पहचान। पतली धोती आंख पर चश्मा, हांथो मे गीता महान। था शब्दवीर और गंभीर, लक्ष्य थे जिसके महान। चलता था सोदेश्य अकेला, आंखों मे आकर्षण था। नही बोलता झूठ कभी वो,…

सत्य का सिपाही

15-07-2006 था पतला दुबला वह योद्धा, नही रखता तरकस तीर कमान। वाणी से सत्य निष्ठ था वो, सादा जीवन उसकी पहचान।

पतली धोती आंख पर चश्मा, हांथो मे गीता महान। था शब्दवीर और गंभीर, लक्ष्य थे जिसके महान।

चलता था सोदेश्य अकेला, आंखों मे आकर्षण था। नही बोलता झूठ कभी वो, आफतों को झेला था।

                                लड़ने को तत्पर रहता था, आज़ादी के जंग को। नही धो सका था कोई, उसके सादे रंग को।

मै छोटा प्रसंसक उसका, अनुयायी भी बन जाऊंगा। ऐ सत्य के सिपाही तुझे प्रणाम, क्या तेरा सपना पूरा कर पाऊंगा।।

दुर्गेश कुमार सिंह www.uddgar.com

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Written by

Durgesh Kumar Singh