बिता पल 1 भूत की बात जब मै थी, वो था, हमारे बीच कोई था, तो वह था – प्यार भरी चाहत | मिलने की आस थी एकांत भी पास थी मृदुल बातें सपनो की रातें, सब थे कब थे ? कैसे थे ? यह सब बीता पल | 2 सिलसिला – मुलाकातों का चलता रहा दिनों तक करते थे बाते एक-दुसरे के बारे में…
1भूत की बातजब मै थी,वो था,हमारे बीच कोई था,तो वह था –प्यार भरी चाहत |मिलने की आस थीएकांत भी पास थीमृदुल बातेंसपनो की रातें,सब थेकब थे ?कैसे थे ?यह सबबीता पल | 2सिलसिला –मुलाकातों काचलता रहा दिनों तककरते थे बातेएक-दुसरे के बारे मेंजब सोते थे हमतो जागते थे सपनेकितना हसीन थावह –बीता पल | 3मै कहती –“तुम कितने अच्छे हो ?तुम कितने भोले हो ?तुम्हारी बातें,तुम्हारा नजरियासबकुछ मुझे रमता है |”जवाब था –“सादगी तुम्हारी भीनी भीनीतेरी मुस्कराहट,बातों की मृदुलताये सबमेरे ह्रदय मेंछुरी मारते हैं |’’ये हसीन बातेंकुछ नहीं, सबबीता पल | 4आज और अबहम दोनो हैं साथपूरी हो गयीवे सारी हसरतेंजो थें सपनेजमीन पर आगयेपरीलोक सेघर से दूरशहर केएक मकान में-एक शिशुएक घरकुछ पैसेबहुत सारी खुशियाँये सपनेबनगए जरूरतघर से निकलेचार कदमकुछ दूर साथ चलेफिर मुड गएअपने-अपनेऑफिस के तरफसुबह से शामबस यही परिणाम | 5 माहांत मेंलक्ष्मी खुशहम भी खुशमौसम आयागोदभराई काखुशियां अपारमिलें बार बारसपने फिर थेजमीन परबुलंदियांआसमान पर | 6प्रेमवात्सल्यसब थेसमय बीताहसरतें बढींदो राहीथा एक दिशाप्रबल हुयीइच्छासाथ चलने कीगहरा हुआ चाहतदिल में थी राहतखुशियाँ थी अपारये सब थींउनके प्रेम एवं सामंजस्यका परिणाम | 7फिर एक दिन,शाम,खाने के बादशनि ने कियामुझपर वज्र प्रहार |प्रभाव –मेरे बातों कानहीं पड़ा उनपरतर्कविनय-निवेदनजीत ना सकाउनका मन |मेरी क्या गलती थी ?मुस्कुरा कर या हंसकरउससे बातें करना |किसी ने भरा थाउनका कानमचाया थाउनके दिल मे तूफान 8बातें ये थींरामप्रवेशमेरा सहकर्मीउसका भाई सन्देशवह भी मेरा सहकर्मीमै हंसमुखबातें करती थी सबसेसब करते थेंमुझे पसंदमै –आशावादीकार्यकुशलअन्य भी गुण थे मुझमेउनकी त्रियक नजरबनी शनि की वज्ररचा षड़यंत्रमेरे जीवन मेंलाया भूकंप | 9मै सोचीवो बीता पलजब उसने कहा था –“तुम्हारी मुस्कराहट भरी बातेंलोगों को बरबसरिझाने वाली मुस्कराहटसबकुछ मुझे अच्छा लगता है |और तुम्हारी बातेंसबको पसंद आती हैं |”फिर आगे कहता –“तुम्हारी अदाएं मुस्कराहटभरीलगती हो जैसे कोई परी |तु हसरत है मेरीतु चाहत है मेरीतुझको मै पाऊंतुझपर जीवन लूटाऊँ|”इत्यादि इत्यादि 10आज और अबमाहौल था विपरीतमै सोची –यही अदाशादी से पहलेलगती थी उनको भला |लोटते थेलट्टू की तरह |गाते थेपट्टू की तरह |वही अदाएंआज उनकोक्यों लगती हैंसर्पदंश जैसी ? 11दूसरी सुबहचला फिर सिलसिलावार्तालाप का |शांत थेमगर रूठे हुएमै समझाई उन्हें-“मै हूँ जीवन संगिनी आपकी |धोखा नहीं फितरत मेरीआपके लिए मेरा दिलचाहत भरीबातें करना मुस्कुरा केक्या ये है आदत बुरी |”वे चुप सुनते रहे मेरी बातेंमै फिर बोली –“क्या इतना कमजोर है हमारा प्यारकि एक झूठे व्यक्ति के शिकायत से डगमगा गया |”एक बारगी मुड़े मेरे तरफमुस्कुरा करफिर दुबारा कहे –“बातें तुम्हारी मुस्कराहटभरीलगती हो जैसे कोई परी |मेरे छोटे से दिल मेंये बात है भरीकहीं खो न दूँ तुझेऐ मेरी परी | 12झूठे उलाहनाझूठे बातअब ना देंगेचाटुकारों का साथक्योंकिजागा था प्यार उनकाखुलीं थीं ऑंखें |कम समय काबड़ा सा दर्दबना था एकहसीन मर्ज |संभलें थे दोनोंचोट खाकरअब वो दर्दभरी बातेंबिता पल नवम्बर 11, 2006.