Saturday, 29 Aug 2026
कविता संग्रह

उठा ले शस्त्र

उठा ले शस्त्र अब तूं देखता है क्या ? दिखा दे भेद उनका अब तूं सोचता है क्या ? छोड़ सत्य को आज जो हुए हैं बहुतेरे मोह कर न उनका जो खड़े हैं सामने तेरे छोडकर इस समर को भागेगा जो तूं इस जहाँ से खोएगा मान अपना और धुन्धलाएगा इस जहाँ में इसलिए हे पार्थ ! उठ ! उठा शस्त…

उठा ले शस्त्र
  उठा ले शस्त्र अब तूं देखता है क्या ? दिखा दे भेद उनका अब तूं सोचता है क्या ?   छोड़ सत्य को आज जो हुए हैं बहुतेरे मोह कर न उनका जो खड़े हैं सामने तेरे   छोडकर इस समर को भागेगा जो तूं इस जहाँ से खोएगा मान अपना और धुन्धलाएगा इस जहाँ में   इसलिए  हे पार्थ ! उठ ! उठा शस्त्र अपना सत्य का सम्मान कर क्षात्रधर्म का न ऐसा अपमान कर   माना है तुझे पार्थ अपना देखकर इसको भी तू अभिमान कर   सोचता है क्या ? क्या कमी है तुझमे उठा धनुष अपना और एक हुंकार भर   सत्य है विजय तेरी इसलिए हे अर्जुन ! तूं असत्य का संहार कर |
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Written by

Durgesh kumar