उठा ले शस्त्र
उठा ले शस्त्र अब तूं देखता है क्या ? दिखा दे भेद उनका अब तूं सोचता है क्या ? छोड़ सत्य को आज जो हुए हैं बहुतेरे मोह कर न उनका जो खड़े हैं सामने तेरे छोडकर इस समर को भागेगा जो तूं इस जहाँ से खोएगा मान अपना और धुन्धलाएगा इस जहाँ में इसलिए हे पार्थ ! उठ ! उठा शस्त…

उठा ले शस्त्र अब तूं देखता है क्या ?
दिखा दे भेद उनका अब तूं सोचता है क्या ?
छोड़ सत्य को आज जो हुए हैं बहुतेरे
मोह कर न उनका जो खड़े हैं सामने तेरे
छोडकर इस समर को भागेगा जो तूं इस जहाँ से
खोएगा मान अपना और धुन्धलाएगा इस जहाँ में
इसलिए हे पार्थ !
उठ ! उठा शस्त्र अपना
सत्य का सम्मान कर
क्षात्रधर्म का न ऐसा अपमान कर
माना है तुझे पार्थ अपना
देखकर इसको भी तू अभिमान कर
सोचता है क्या ?
क्या कमी है तुझमे
उठा धनुष अपना और एक हुंकार भर
सत्य है विजय तेरी
इसलिए हे अर्जुन !
तूं असत्य का संहार कर |


