📅 15 Oct 2026“साहित्य समाज का दर्पण है, और विचार बदलाव की शुरुआत।”
कविता संग्रह

उठा ले शस्त्र

उठा ले शस्त्र

उठा ले शस्त्र

उठा ले शस्त्र अब तूं देखता है क्या ?

दिखा दे भेद उनका अब तूं सोचता है क्या ?  

छोड़ सत्य को आज जो हुए हैं बहुतेरे

मोह कर न उनका जो खड़े हैं सामने तेरे  

छोडकर इस समर को भागेगा जो तूं इस जहाँ से

खोएगा मान अपना और धुन्धलाएगा इस जहाँ में  

इसलिए  हे पार्थ !

उठ ! उठा शस्त्र अपना सत्य का सम्मान कर

क्षात्रधर्म का न ऐसा अपमान कर  

माना है तुझे पार्थ अपना

देखकर इसको भी तू अभिमान कर  

सोचता है क्या ?

क्या कमी है तुझमे

उठा धनुष अपना और एक हुंकार भर  

सत्य है विजय तेरी

इसलिए हे अर्जुन !

तूं असत्य का संहार कर |

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Written by

Durgesh kumar

“मन के भावों की उत्कृष्ट उद्गार ही रचनात्मकता है।”