Sunday, 30 Aug 2026
कविता संग्रह

छू ले देवत्व को

छू ले देवत्व को पा ले अमरत्व को जीवन की पूर्णता मे मिटा दे अपनत्व को जीवन का सार क्या लक्ष्यों की प्राप्ति बस संघर्ष के आधार मे अभीष्ठ की प्राप्ति बस ले एक उड़ान तू छू ले आसमान को बंध न पैमाने मे नई राह दे इंसान को।

छू ले देवत्व को
छू  ले  देवत्व  को पा ले अमरत्व को जीवन की पूर्णता मे मिटा दे अपनत्व को                              जीवन का सार क्या                              लक्ष्यों की प्राप्ति बस                              संघर्ष के आधार मे                              अभीष्ठ की प्राप्ति बस ले एक उड़ान तू छू ले आसमान को बंध न पैमाने मे नई राह दे इंसान को।
D
Written by

Durgesh Kumar Singh