यदि कांग्रेस पर सबसे ज्यादा किसी व्यक्ति का छाप पड़ा तो वह हैं- गांधी। कांग्रेस ने यदि सबसे ज्यादा किसी शब्द का फायदा उठाया तो वह है- गांधी। और कांग्रेस ने सबसे ज्यादा जिनके विचार का शाब्दिक समर्थन किया तो वह हैं- गांधी। लेकिन क्या कांग्रेस वास्तव मे गांधी के…
यदि कांग्रेस पर सबसे ज्यादा किसी व्यक्ति का छाप पड़ा तो वह हैं- गांधी।
कांग्रेस ने यदि सबसे ज्यादा किसी शब्द का फायदा उठाया तो वह है- गांधी।और कांग्रेस ने सबसे ज्यादा जिनके विचार का शाब्दिक समर्थन किया तो वह हैं- गांधी।लेकिन क्या कांग्रेस वास्तव मे गांधी के भावनावों को ग्रहण करती है?आज के परिवेश मे भी मै कहूंगा- हाँ।अपने ''हाँ " के समर्थन मे मै यही कहूंगा कि गांधी जी वैज्ञानिक नही थे लेकिन अपने राजनैतिक विचारों पर विज्ञानसम्मत प्रयोगधर्मी जरूर थे ।यही काम आज भी कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियां कर रही हैं।बस फर्क ये है कि गाँधी के प्रयोगों मे जो स्थान अंग्रेजों का था वह आज कांग्रेस और विपछी पार्टियां ले रही हैं। अंग्रेज गाँधी के शक्तिशाली विचारों को तर्कहीन सिद्ध करने का प्रयास किये थे। ठीक इसी तरह की प्रतिक्रिया आज सी ए ए और एन आर सी पर कांग्रेस कर रही है।हम जानते हैं कि एकही रास्ते पर एकही दिशा मे बार बार जायेंगे तो हम बार बार वहीं पहुचेंगे जहां हम पहले पहुंचे थे।आजादी से पहले नए संविधान पर जगह जगह से विचार आमंत्रित किये जारहे थे ।व्यस्था बदलाव की थी, आशा की किरण दिख रही थी और परिणाम भी सकारात्मक मिला लेकिन विभाजन का चोट भी लगा जिसकी त्रासदी आजभी हम झेल रहे हैं।संविधान मे आयी त्रुटियों को सुधारने के लिए एक व्यवस्थित प्रक्रिया के तहत भाजपा अपने प्रयोग कर रही है,जिसमे अलगाववादी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।यही वो बिंदु है जहाँ भाजपा को सोचना चाहिए और आइंस्टीन के इस विचार पर गौर करना चाहिए जो मै आगे लिख रहा हूं- इस ब्रह्मांड से इतर कोई न कोई संरचना जरूर है जो इस ब्रह्मांड के विपरीत है।भले एक ही काम दोनो जगह हो लेकिन परिणाम पूर्णयता भिन्न मिलता ।ठीक ऐसा ही कुछ भाजपा करे यानि कि गांधी के प्रयोग तो हों लेकिन इसके विपरीत परिणाम हो यानी हमसब विघटित हुए बिना एकता के सूत्र बंधे रहें।