Saturday, 29 Aug 2026
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बदलते परिवेश मे मुददे और भाजपा

एक ऐसा समय था जब धारा 370 हटाने और राम मंदिर निर्माण के चर्चा भर से ही माहौल रक्त रंग सा हो जाता था, भौहें माथे को ढँक लेती थी और माहौल संभालना टेढ़ी खीर हो जाती थी| और आजका एक माहौल है जब ये कोई बड़ा मुद्दा ही नहीं रहा | विपछ इसपर बोलने से कतरा रहा है और एक ही…

बदलते परिवेश मे मुददे और भाजपा
 एक ऐसा समय था जब धारा 370 हटाने और राम मंदिर  निर्माण के चर्चा भर से ही माहौल रक्त रंग सा हो जाता था, भौहें माथे को ढँक लेती थी और माहौल संभालना टेढ़ी खीर हो जाती थी|     और आजका एक माहौल है जब ये कोई बड़ा मुद्दा ही नहीं रहा | विपछ इसपर बोलने से कतरा  रहा है  और एक ही चर्चा बार बार हो यह पछ को अच्छा नहीं लग रहा है | तो क्या हम मान लें कि अब हमारे राजनीती में कोई विशेष मुद्दा नहीं रहा | इसपर हम बाद में चर्चा करेंगे | पहलें हम जान लें कि विपछ चुप क्यों है ?      पिछले कुछ वर्षों से भाजपा की जन-सांस्कृतिक कल्याणकारी नीतियों ने उसे बहुत मजबूत बना दिया है | आम जनता उससे प्रभावित है इस बात को भापते हुए अन्य पार्टी वाले अपनी बची खुची जनाधार बचाने के लिए चुप रहना ही उचित समझते हैं |      प्रारंभ में हिन्दू वोट बंटे होने के कारण विभिन्न पार्टियों के स्वाभाविक एवं स्थाई वोट थे और उन पार्टियों का ध्यान मुस्लिम वोटर को रिझाने में ही था जो सामूहिक रूप से भाजपा विरोधी पार्टी के पछ में संगठित होते थे लेकिन आज दोनों वोटरों की स्थिति बदल रही है |      भाजपा के भारतीय संस्कृती का एक नया एवं स्थायी रूप देने के वजह से हिन्दू वोटर उनके प्रति संगठित रूप से समर्पित है वहीँ मुस्लिम वोटर भी  विकास कि गंगा में हाथ धोने के लिए ललायित है | इन सब परिस्थितियों में विपक्ष असमंजस की स्थिति में है क्योंकि बोलेगी तो स्वाभाविक वोट हाथ से जायेंगे और चुप रहने पर निष्क्रिय विपक्ष कहलाएंगे | शायद इसीलिए वे पेगासस, साईकिल यात्रा और जातिवाद पर काम कर रहे है | ये सब उन्हें चर्चा में तो लारहे हैं लेकिन इनके सार्थकता को भी जनता जानने लगी है |      यहीं से हम पहले पैरा के प्रश्न पर चलते हैं | जब सारे मुददे पुरे हो जाएँ  तब भी एक मुद्दा होता है वह कि हम इस समय को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं ? और विकासवाद से अच्छा कोई दिशा नहीं होता क्योंकि हम विकास नहीं करेंगे तो निश्चय ही हम विनाश के तरफ बढ़ेंगे | वैसे हम सब जानते हैं कि कालचक्र न रुकने वाली एक अद्भुत यन्त्र है |      अब प्रश्न उठता है कि भाजपा को क्या करना चाहिए ?     स्वभावतः भाजपा को राष्ट्रवादी सोच के साथ विकास करना चाहिए और उस सोच में सांस्कृतिक विकास भी होनी चाहिए क्योंकि संस्कृति किसी भी समाज कि अदृश्य आत्मा ही नहीं होती बल्कि उसका दृश्य वस्त्र भी होती है इसलिए भाजपा को भारतीय संस्कृति को विकास का एक सार्थक रूप देना चाहिए | जिसमे देश के सभी वर्गों में भारतीय सांस्कृतिक राष्ट्रभाव हो |       दुर्गेश कुमार सिंह मंडल उपाध्यक्ष भाजपा, युवामोर्चा, फाजिलनगर कुशीनगर  
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Written by

Durgesh Kumar Singh