प्रजातंत्र दुनिया मे स्थापित अबतक के सबसे सफल शासनात्मक तंत्रों मे सर्वोपरि है | जहाँ भी प्रजातंत्र हैं वहाँ विकास के इतिहास गढ़े गए हैं | प्रजातंत्र का सबसे अच्छा गुण, शुन्य से लेकर सिखर तक के लोगों के सर्वाधिकारों की सुरक्षा है |`प्रजातंत्र में अन्य तंत्रों…
प्रजातंत्र दुनिया मे स्थापित अबतक के सबसे सफल शासनात्मक तंत्रों मे सर्वोपरि है | जहाँ भी प्रजातंत्र हैं वहाँ विकास के इतिहास गढ़े गए हैं | प्रजातंत्र का सबसे अच्छा गुण, शुन्य से लेकर सिखर तक के लोगों के सर्वाधिकारों की सुरक्षा है |`प्रजातंत्र में अन्य तंत्रों की अपेक्षा लोगों को ज्यादा आज़ादी मिलती है | जनता अपने विचारों को स्वेछा से व्यक्त करती है | अपने अधिकारों की रक्षा के लिए उन्नमुख रहती है और जनता के पास अपने इच्छानुसार सरकार बनाने का संवैधानिक अधिकार भी होता है |
किसी भी तंत्र में सबसे बड़ी समस्या वहां होने वाले क्रांति से पैदा होती है | मै समस्या इसलिए कह रहा हूँ कि क्रांति सकारात्मक हो या नकारात्मक वह तत्कालीन व्यस्था में बदलाव लाती है | जिसे सत्ताधारी नहीं चाहते हैं | इसी समस्या से बचने के लिए प्रजातंत्र में चुनाव की व्यस्था कि जाती है | मेरे हिसाब से चुनाव एक संविधान प्रद्दत क्रांति है, जिसे एक निश्चित समयांतराल पर लोगों को अपने हिसाब से व्यस्था में बदलाव करने का अधिकार दिया जाता है | इन्ही सब गुणों के वजह से अमेरिका और भारत जैसे बड़े देश लम्बे समय तक स्थिर सरकार देते हैं | जिससे आम जनमानस सुकून से रहती है और अपने सुविधा अनुसार विकास के राह पर चलती है |
सही बात ये है कि आम आदमी के सशक्तता और आज़ादी का मूल आधार उसके सुरक्षित अधिकार हैं | जो हमारे देश में हमे संविधान के द्वारा दिया जाता है | ये अधिकार हमारी ताकत हैं | आज़ादी के बाद इस अधिकार का दुरूपयोग प्रजातंत्र विरोधी शक्तियों द्वारा समय समय पर किया गया है और पिछले दो सालों से इस ताकत का दुरूपयोग कुछ ज्यादे ही हो रहा है |
मै आपको दस साल पीछे ले चल रहा हूँ जब एक समाजसेवी ने तत्कालीन कांग्रेसी सरकार से लोकपाल विधेयक लाने के लिए आन्दोलन किया था जो वास्तव में गाँधी के सत्याग्रह से प्रेरित था | इस आन्दोलन का सार्थक उद्देश्य था जो बातचीत से मुद्दों के हल पर केन्द्रित था | यह हमारे संवैधानिक अधिकारों के सार्थक उपयोग का एक नमूना था लेकिन आज क्या हो रहा है ? कभी शाहीन बाग़ जैसे आन्दोलन होरहे हैं तो कभी किसान आन्दोलन, मै इन दोनों ही आन्दोलनों को निर्मूल मानता हूँ क्योकि इनमे संवैधानिकता का कहीं भी कोई एक अंश नहीं है | इसमें एक पछ स्थिर है तो दूसरा अड़ियल, एक स्थिर चित्त है तो दूसरा उग्र इन्हें संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों का हनन ही कहेंगे | अगर कुछ देर के लिए मानलिया जाय कि किसान आन्दोलन सही है और यह भी मानलिया जाय कि ट्रेक्टर रैली सही है तो लालकिला पर हमला को किन अधिकारों का उपयोग कहा जायेगा | दम है तो संवैधानिक तरीके से झंडा फहरा कर दिखाएं |
अब हम बात करेंगे कि वजह क्या है ?
वजह है एक स्थिर सरकार को अस्थिर करना, उनके सफलताओ को नजरअंदाज करना, उन्हें जनता तक न पहुचाना, लोगों के मन में भ्रम पैदा करना और फिर सत्ता को प्राप्त करना |
इन सबसे किसान कौन सी सरकार बनायेंगे ये तो मुझे नहीं पता लेकिन इसका पूरा फायदा विपछि दल ले जायेंगे और किसान फिर शिकार होंगे जैसे पहले से होते आ रहे हैं |
प्रजातान्त्रिक मूल्यों के हनन का दूसरा वजह हो सकता है अंतर्राष्ट्रीय जगत के प्रजातांत्रिक मूल्यों के दुश्मन जो विश्व में प्रजातंत्र को सफल होते नहीं देख सकते | इसका प्रथम उदाहरण है चीन, जिसने पुरे दक्षिणी एशिया के प्रजातान्त्रिक देशों की व्यस्था ख़त्म करने कि रणनीति बनायीं है |मै जब इस लेख को लिखना सुरु किया था तो म्याह्मार की घटना सामने नही आई थी | अब मेरा विश्वास और प्रबल हो गया है कि पुरे विश्व में प्रजातंत्र के विरुद्ध कुछ न कुछ चल रहा है |
पाकिस्तान एक असफल लोकतान्त्रिक देश है | म्याह्मार की लोकतान्त्रिक सरकार सेना द्वारा हटा दी गयी है | अमेरिका में एक हारे हुए राष्ट्रपति प्रत्याशी ने प्रजातंत्र का मजाक उड़ाया और अब भारत बेवजह के आन्दोलनों में फंसा हुआ है |
वैसे भारत की लड़ाई कुछ अलग है और वैचारिक है | यहाँ गाँधी के लोकतंत्र और और आधुनिक प्रजातंत्र की लड़ाई है | जो कांग्रेस गाँधी के प्रजातंत्र की बात कर रहा है उसे समझ लेना चाहिए कि अमेरिका में गाँधी के प्रतिमा के अपमान का क्या मतलब होता है और उनके अपने ही देश के जेएनयू में समय-समय पर प्रजातंत्र के विरुद्ध घटनाये होती रहती हैं उनके कर्ताओं के बारे में वह कुछ तो सोचे|
कांग्रेस को यह चाहिए कि वह प्रजातंत्र के वैश्विक विरोधियों का परोक्ष समर्थन न करे | अरे ! देश रहेगा तो ही हजारो गाँधी आयेंगे और सैकड़ों बार प्रजातंत्र का आधुनिकीकरण होगा लेकिन तभी जब हम और हमारा तंत्र सलामत रहेगा |
कांग्रेस को चाहिए कि विकास को विवाद का मुद्दा न बनाये | प्रजातंत्र को बचाए |