आज हम संक्षेप में ही सही मोदी सरकार-2 की बात करते हैं | मोदी और उनकी टीम ने अपने दूसरे चरण में एक स्पष्ट दृष्टिकोण से काम करने कि सुरुआत की | वे अपने घोषणा पत्र को आधार मन कर चरणबद्ध तरीके से काम कि सुरुआत की जो इस प्रकार है – आर्थिक रूप से कमजोर तबके को आरक्षण,तीन तलाक पर प्रतिबन्ध, धारा 370 कि समाप्ति, इनसब से अलग नागरिक संसोधन बिल का पारित होना और अब नए कृषि कानून का बनना | ये सभी सशक्त सरकार की स्पष्ट प्रतिक हैं |
अब इन्ही मुद्दों पर विपक्ष कि स्थिति को देख लें जिसके पास विरोध की कोई निति ही नहीं है, स्पष्ट तर्क नहीं है जिसका अस्तित्व केवल और केवल विरोध तक ही सिमित रह गया है | जो विपक्ष अपने आप को धर्मनिरपेक्ष कहते थे उन्होंने खुद धर्म को आधार बना कर विरोध किया | आर्थिक रूप से कमजोर तबके के आरक्षण को गलत कहा, धारा 370 के हटाने को कश्मीरियों के अधिकारों का हनन कहा| इन सब से अलग जब विरोध का कारण नहीं मिला तो सी ए ए को मुद्दा बना कर शाहीनबाग़ कांड को अंजाम दिया और अब उसी सूत्र का प्रयोग करके नए कृषि कानूनों के विरोध में किसानो को खड़ा क्र रही है |विपक्ष कि साडी करतूतें कोरी बकवास हैं जिनका कोई आधार ही नहीं है |शायद विपक्ष के पास एक ही मुद्दा है कि हम विपक्ष के हैं तो विरोध करेंगे | यह भी कोई बात हुई |
इन सबके साथ हम कांग्रेस और भाजपा के कार्यिक विकास की संक्षिप्त चर्चा कर ले तो बातें ज्यादा स्पस्ट होंगी –
निःसंदेह देश की आज़ादी में कांग्रेस का अभूतपूर्व अतुलनीय योगदान रहा कांग्रेसी रणनीतिकारो ने अपने संगठित एवं सुनियोजित संघर्षों से देश को आज़ादी दिलाई | आज़ादी के समय उपस्थित नेतृत्व में किसी तरह कि कोई कमी नहीं थी |वे अपने संघर्षों से अर्जित अनुभव के दम पर आगे जाने वालों में से थे | आज़ादी के बाद में भी सफल नेतृत्व उभरें लेकिन उनके प्रभाव का वजह आज़ादी के संघर्षों से जुडा था |यहाँ तक तो ठीक था लेकिन इसके बाद जो नेतृत्व उभरा वह खुद को आनुवांशिक नेता मानते हैं वो केवल इसलिए नेता हैं कि वे नेताओं के घर में पैदा हुए हैं |शायद उन्हें यह नहीं पता कि पैत्रिक रूप से धन मिल सकता है अनुभव नहीं | अनुभवों के लिए प्रयासों की, निरंतर संघर्षों कि जरूरत पड़ती है |शायद यह बात कांग्रेस एवं अन्य विपक्षी पार्टिया नहीं समझ रही हैं और मौका मिलने पर अर्थ के लिए सारे अनर्थ कर रहे हैं |
अब हम थोड़ी चर्चा वर्तमान सत्ताधारी पार्टी की कर लें| भाजपा आज़ादी के बाद उभरी सभी पार्टियों में सबसे आगे जाने वाली पार्टी रही है लेकीन आज जो प्रभाव हम देख रहें हैं वह ऐसे ही नहीं आया उन्हे भी संघर्ष करना पड़ा और इनका संघर्ष कांग्रेस के संघर्षों से अलग है |जहाँ कांग्रेस एक दमनकारी साम्राज्यवादी विचारधारा विरोध में थी वहीँ भाजपा अपनों से ही अपनी हजारों साल पुराणी धार्मिक,सांस्कृतिक एवं पारंपरिक अस्तित्व को बचाने के लिए किये गए संघर्षों से उभरी है | इसके पास कोई पैत्रिक अनुभव नहीं है |वे अपने अपने-अपने संघर्षों से उभरे और सांस्कृतिक एवं आर्थिक विकास की पैरवीकार हैं | यही बात कांग्रेसी विचारधारा से गायब है |
वर्तमान राजनीती कि बात हो और मोदी की चर्चा न हो यह ठीक नहीं होगा |मोदी ने जो आर्थिक,सामाजिक,पारिवारिक एवं व्यक्तिगत विपत्तियों को झेला वही उन्हें आज की राजनीती में अपने सकारात्मकता के विरोध की विपत्ति को हल करने कि शक्ति दे रहा है |वे अपने अनुभवों के दम पर अपने विरोध में उठे आवाज का सार्थक तर्कों द्वारा उत्तरित करते हैं और विरोध में भी विकास खोजते हैं |
मोदी के बारे में मेरी जो समझ वो इस पंक्ति से व्यक्त करूँगा – विपत्तियों में भी जो विकास की बात करे वही मोदी है |
दुर्गेश कुमार सिंह
मंडल उपाध्यक्ष,भाजपा,युवा मोर्चा, फाजिलनगर
20 जनवरी 2021



