बेशक भारतीय जनता पार्टी का पिछला 5 साल सफलताओं एवं उपलब्धियों से भरा रहा। एक तरफ जहां कई दशकों के अधूरे मुद्दे जिसमें बेहतर स्वास्थ्य, खाद्य,बिजली,महिलाओं की खासकर ग्रामीण एवं मुस्लिम गृहणियों की स्थिति कृषि एवं परिवहन आदि में चरम सीमा तक विकास का सफल प्रयास रहा वहीं दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को सशक्त एवं जिम्मेदार राष्ट्र बनाने में भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। पाकिस्तान को आतंकवाद पर कूटनीतिक एवं सामरिक प्रयास के द्वारा दुनिया से अलग-थलग किया जो अब तक एक दिवास्वप्न था । इन्ही सब प्रयासों के परिणाम स्वरूप भाजपा दूसरी पारी के लिए अपने को सशक्त दशा में पायी और सफल भी रही।
दूसरे चरण में भाजपा ने शुरू से ही अपने वादों को पूरा करने का निर्विराम प्रयास करती रही और सफल भी रही।हां यह सच है कि आर्थिक मोर्चे पर इस कमजोर हुआ लेकिन कमोवेश यही स्थिति पूरे विश्व की है।जिसमे सुधार के लिए सुनियोजित तरीके से चरणबद्ध प्रयास करने होंगे।
दूसरे चरण मे भाजपा को यदि सबसे ज्यादे कुछ झेलना पड़ा तो वह है सी ए ए और एनआरसी का बेवजह निरुद्देश्य विरोध जो पूरी तरह से देश को गर्त में ले जा सकता है। जिसमें कांग्रेस एवं वामपंथी विचारधारा के लोग मुस्लिम युवाओं को जरिया बनाकर अपने हित साधने का प्रयास कर रहे हैं जिसमें वे बहुत हद तक सफल भी हैं ।
मैं आप सबको लगभग दो दशक पहले लेकर चलना चाहता हूं । तब भी केंद्र में भाजपा की ही सरकार थी और प्रधानमंत्री थे अटल बिहारी वाजपेयी और विपक्ष मे कांग्रेस थी । संसद में दोनो ही लगभग सामान ताकत रखते थे ।जिसका फायदा ज्यादातर कांग्रेस ने ही उठाया। कुछ लोगों को याद होगा कि उस समय की संसद की कार्यवाही में कांग्रेस कैसे बखेड़े उत्पन्न करती थी कई कई दिन तक संसद की कार्यवाही ठप रहती थी । कांग्रेस भाजपा के संसदीय एवं लोकतांत्रिक प्रयास मे अपने गलत हरकतों से बाधा उत्पन्न करती थी और इसी तरह अटल जी का पूरा कार्यकाल बीत गया । कुछ इसी तरह का कार्य कांग्रेस इस कार्यकाल मे कर रही है। हालांकि वह संसद में कमजोर अंक के साथ है इस लिए वह वहां सफल नहीं हो पा रही है तो जनता को बरगला कर संसद के बाहर हलचल पैदा कर रही है जिसका परिणाम सी ए ए और एनआरसी कांड है । मैं इसे कांड ही कहूंगा
भाजपा यह न सोचें कि पिछली चरण की भांति इस चरण में भी उसे सकारात्मक सहयोग मिलेगा बड़े प्रयास के लिए बड़े विरोधियों का खासकर अपने ही लोगों का विरोध सहना पड़ता है। भाजपा जिन लक्ष्यों को साधना चाहती है वह बहुत ही कठिन है हां यह सच है कि उसके पास संवैधानिक आंकिक ताकत है लेकिन फिरभी उसे कठिनाई झेलनी पड़ेगी और हर सकारात्मक प्रयास पर झेलनी पड़ेगी।
इससे उबरने के लिए एक ही रास्ता है-जनता की सेवा मे, जनता की भलाई के लिए, जनता के ही विरोधों को झेलने की आदत अपने चरित्र में डाल ले यदि मैं काव्य की सहायता लूं तो-
हर कदम पर कांटे हैं
हर राह नुकीली है
जब लक्ष्य ही हमने ऐसा चुना
तो फिर किस बात का गम है।
बेसक इसी सोच पर चलने पर ही जनता उसे अपने सर माथे पर लेगी।किस बात का ग़म है
बेशक भारतीय जनता पार्टी का पिछला 5 साल सफलताओं एवं उपलब्धियों से भरा रहा। एक तरफ जहां कई दशकों के अधूरे मुद्दे जिसमें बेहतर स्वास्थ्य, खाद्य,बिजली,महिलाओं की खासकर ग्रामीण एवं मुस्लिम गृहणियों की स्थिति कृषि एवं परिवहन आदि में चरम सीमा तक विकास का सफल प्रयास…
बेशक भारतीय जनता पार्टी का पिछला 5 साल सफलताओं एवं उपलब्धियों से भरा रहा। एक तरफ जहां कई दशकों के अधूरे मुद्दे जिसमें बेहतर स्वास्थ्य, खाद्य,बिजली,महिलाओं की खासकर ग्रामीण एवं मुस्लिम गृहणियों की स्थिति कृषि एवं परिवहन आदि में चरम सीमा तक विकास का सफल प्रयास रहा वहीं दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को सशक्त एवं जिम्मेदार राष्ट्र बनाने में भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। पाकिस्तान को आतंकवाद पर कूटनीतिक एवं सामरिक प्रयास के द्वारा दुनिया से अलग-थलग किया जो अब तक एक दिवास्वप्न था । इन्ही सब प्रयासों के परिणाम स्वरूप भाजपा दूसरी पारी के लिए अपने को सशक्त दशा में पायी और सफल भी रही।
दूसरे चरण में भाजपा ने शुरू से ही अपने वादों को पूरा करने का निर्विराम प्रयास करती रही और सफल भी रही।हां यह सच है कि आर्थिक मोर्चे पर इस कमजोर हुआ लेकिन कमोवेश यही स्थिति पूरे विश्व की है।जिसमे सुधार के लिए सुनियोजित तरीके से चरणबद्ध प्रयास करने होंगे।
दूसरे चरण मे भाजपा को यदि सबसे ज्यादे कुछ झेलना पड़ा तो वह है सी ए ए और एनआरसी का बेवजह निरुद्देश्य विरोध जो पूरी तरह से देश को गर्त में ले जा सकता है। जिसमें कांग्रेस एवं वामपंथी विचारधारा के लोग मुस्लिम युवाओं को जरिया बनाकर अपने हित साधने का प्रयास कर रहे हैं जिसमें वे बहुत हद तक सफल भी हैं ।
मैं आप सबको लगभग दो दशक पहले लेकर चलना चाहता हूं । तब भी केंद्र में भाजपा की ही सरकार थी और प्रधानमंत्री थे अटल बिहारी वाजपेयी और विपक्ष मे कांग्रेस थी । संसद में दोनो ही लगभग सामान ताकत रखते थे ।जिसका फायदा ज्यादातर कांग्रेस ने ही उठाया। कुछ लोगों को याद होगा कि उस समय की संसद की कार्यवाही में कांग्रेस कैसे बखेड़े उत्पन्न करती थी कई कई दिन तक संसद की कार्यवाही ठप रहती थी । कांग्रेस भाजपा के संसदीय एवं लोकतांत्रिक प्रयास मे अपने गलत हरकतों से बाधा उत्पन्न करती थी और इसी तरह अटल जी का पूरा कार्यकाल बीत गया । कुछ इसी तरह का कार्य कांग्रेस इस कार्यकाल मे कर रही है। हालांकि वह संसद में कमजोर अंक के साथ है इस लिए वह वहां सफल नहीं हो पा रही है तो जनता को बरगला कर संसद के बाहर हलचल पैदा कर रही है जिसका परिणाम सी ए ए और एनआरसी कांड है । मैं इसे कांड ही कहूंगा
भाजपा यह न सोचें कि पिछली चरण की भांति इस चरण में भी उसे सकारात्मक सहयोग मिलेगा बड़े प्रयास के लिए बड़े विरोधियों का खासकर अपने ही लोगों का विरोध सहना पड़ता है। भाजपा जिन लक्ष्यों को साधना चाहती है वह बहुत ही कठिन है हां यह सच है कि उसके पास संवैधानिक आंकिक ताकत है लेकिन फिरभी उसे कठिनाई झेलनी पड़ेगी और हर सकारात्मक प्रयास पर झेलनी पड़ेगी।
इससे उबरने के लिए एक ही रास्ता है-जनता की सेवा मे, जनता की भलाई के लिए, जनता के ही विरोधों को झेलने की आदत अपने चरित्र में डाल ले यदि मैं काव्य की सहायता लूं तो-
हर कदम पर कांटे हैं
हर राह नुकीली है
जब लक्ष्य ही हमने ऐसा चुना
तो फिर किस बात का गम है।
बेसक इसी सोच पर चलने पर ही जनता उसे अपने सर माथे पर लेगी।

