Sunday, 30 Aug 2026
कविता संग्रह

हे विद्यादात्री

हे प्रकाशमयी विद्यादात्री जन-गन-मन की अधिष्ठात्री मै करूं तेरी आरती सुबह-रात्रि दो ज्ञान हमे हे विद्या दात्री हे ज्ञान गंग हम करें वंदना तेरी, एक संग हम बने सुशील और विद्यावान हममे भर दो तुम यही उमंग हे जग कल्याणी, कला की वाणी तुम बिन हम सब हैं अधूरे हे कमलवा…

  हे प्रकाशमयी विद्यादात्री जन-गन-मन की अधिष्ठात्री मै करूं तेरी आरती सुबह-रात्रि दो ज्ञान हमे हे विद्या दात्री हे ज्ञान गंग हम करें वंदना तेरी, एक संग हम बने सुशील और विद्यावान हममे भर दो तुम यही उमंग हे जग कल्याणी, कला की वाणी तुम बिन हम सब हैं अधूरे हे कमलवासिनी, विनाधारणी कला-ज्ञान भर दो हम सबमे
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Written by

Durgesh Kumar Singh