मै लिख रहा हूँ एक कविता
कागज के पन्नों पर नहीं
समाजिक सिलाम्पट्ट पर
जो डालेगा नहीं
प्रकाश बुराइयों पर
ओ दिखलाएगा नही
बेमतलब की कमजोरिया
ओ एक ही बात सिखाएगा
तुम बनो ओ शक्ति
जो नियंत्रित करे
उस तुक्ष कण
को जो सर्व व्याप्त पर अनियंत्रित है
और कारण है
सभी
कमजोरिओं एवं बुराइओं का



