📅 15 Oct 2026“साहित्य समाज का दर्पण है, और विचार बदलाव की शुरुआत।”
कविता संग्रह

आजाओ मिलने

आजाओ मिलने

आजाओ मिलने

मेरे कहानियों मे तूं बहुत मशहूर है।

सुना है तूं भी मेरे इश्क मे मजबूर है।

तेरा इंतेजार करता हूँ अब भी

मगर ये वक्त भी बड़ा मगरूर है।

जब तेरी आँखों ने छेड़ा था मेरे दिल को

आज भी वो दिन खुशनसीब है।

कत्ल करने को आमद थी तेरी वो हंसी

आज तूं कहीं और, ये वक्त की तरकीब है।

कुछ चाहत न है बस खुश रहे तू                                    तमन्ना बस एक ही मुलाकात की।

चाहत न लेले जन्मों का फेरा

वक्त क़ातिल है, डर इसी बात की।

बात थी बहुत तेरे मेरे दरमियां

पास होने को हम भी सोचे न थे

दूर होने के कारण थे बहुत

तुम कुछ न कहे और हम मगरूर थे।

खुशी न मिले सही पर जिल्लत भी न हो

वक्त और जमां की किल्लत भी न हो

रूहानी इश्क के कातिल के आने से पहले

एक सेहर तुम आजाओ मिलने।                                               13-01-2025

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Written by

DURGESH KUMAR SINGH

“मन के भावों की उत्कृष्ट उद्गार ही रचनात्मकता है।”