📅 15 Oct 2026“साहित्य समाज का दर्पण है, और विचार बदलाव की शुरुआत।”
कविता संग्रह

तो फिर

किस बात का गम है ?

तो फिर

कसूर क्या उन काँटों का जो मुझको चुभते हैं

राह जब मैंने यही चुना तो फिर,

किस बात का गम है ? 

मै भी हूँ बड़ा कातिल जो मसला था बेदर्दी से उन्हें 

अब दर्द हो गया खुद का तो फिर,

लौटना किसके लिए है?  

बात ही कुछ ऐसी बनी जो चल दिया इन राहों पे

अब मिल गया मुझको दिशा तो फिर,

भटकाव किस बात का है?  

दिख रहा मंजिल मुझे अब अपना

जो दूर है अभी बहुत

अब दर जाऊं इन काँटों से तो तो फिर,

ये बलिदान किस बात के थे ?  

दामन बिछाए खुशियाँ हैं थाम सकता हूँ उन्हें

पा के रूक जाऊं इन्हें तो फिर,

उद्देश्य मेरे कहाँ गए ?  

ऐसा मोड़ मिलता है मुझे कुछ ही अंतरालों पर

गर घूम जाऊं मै तो फिर,

अस्तित्व मेरा कहाँ रहा ?  

आज मै पंहुचा फिर उसी कमसिन मोड़ पर

गर पैर डगमगा गए तो फिर,

गर्व किस बात पर था?  

बढ़ जा आगे एक बार फिर

रूक गया तो मिट गया

और ‘तूं’ नहीं रहा तो फिर,

इस जिस्म की औकात क्या है?

2003

D
Written by

DEWANG SHAKTI "DURGESH"

“मन के भावों की उत्कृष्ट उद्गार ही रचनात्मकता है।”