📅 15 Oct 2026“साहित्य समाज का दर्पण है, और विचार बदलाव की शुरुआत।”
कविता संग्रह

हे विद्यादात्री

सरस्वती वंदना

हे विद्यादात्री

हे प्रकाशमयी विद्यादात्री

जन-गन-मन की अधिष्ठात्री

मै करूं तेरी आरती सुबह-रात्रि

दो ज्ञान हमे हे विद्या दात्री हे

ज्ञान गंग हम करें वंदना तेरी, एक संग

हम बने सुशील और विद्यावान

हममे भर दो तुम यही उमंग

हे जग कल्याणी,

कला की वाणी

तुम बिन हम सब हैं अधूरे

हे कमलवासिनी, विनाधारणी

कला-ज्ञान भर दो हम सबमे

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Written by

DEWANG SHAKTI "DURGESH"

“मन के भावों की उत्कृष्ट उद्गार ही रचनात्मकता है।”