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उत्कंठा

  • By DURGESH KUMAR SINGH
  • March 12, 2024

वैचारिक रूप मे जिंदा रहने की आकांछा हमे महान बनाती है जबकि शारीरिक रूप से अमर होने की उत्कंठा हमे शैतान बनाती है।

कई दिनों तक मेरे जेहन मे वो प्रश्न सा दिखने वाला उत्तर कौंधता रहा मै एक सस्पिशन मे था कि सफलता के लिए जरूरी क्या है?उनकी पूरी...

बात उन दिनों की है जब मै राजनीति मे जाने की सोच रहा था। गांधी,इंदिरा, अटल हर वक्त दिमाग मे गूंजते रहते थे। अब्राहम लिंकन के संघर्ष,...