प्रजातंत्र की रणभूमि मे, विगुल कभी बज सकता है । कौटिल्य के “शतरंज”मे, “गो”की नीति भी चल सकता है। वादों के प्रचार में, विवादों का प्रपंच चल...
मेरे कहानियों मे तूं बहुत मशहूर है। सुना है तूं भी मेरे इश्क मे मजबूर है। तेरा इंतेजार करता हूँ अब भी मगर ये वक्त भी बड़ा...
जीत हो या हार हो भ्रस्टाचार पर प्रहार हो चक्र समय का घूम रहा स्वल्प का संहार हो देवस्थापना हो चुका अब देवत्व का प्रसार हो कुचक्र...
राह जटिल है समय कुटिल है कर पार इसे तो तूं प्रवीण है। जैव सम्पन्न हो मेल मिलन हो पा ले इसको तो तूं प्रवीण है। मोड़...
