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प्रजातंत्र की रणभूमि मे, विगुल कभी बज सकता है । कौटिल्य के “शतरंज”मे, “गो”की नीति भी चल सकता है। वादों के प्रचार में, विवादों का प्रपंच चल...

नौकरी मे ईमान और बिज़नेस मे आराम जिस दिन भूल गए तरक्की उसी दिन मिल जाएगी लेकिन राजनीति मे ये दोनों भूलने पर ही कुछ भी संभव...

मेरे कहानियों मे तूं बहुत मशहूर है। सुना है तूं भी मेरे इश्क मे मजबूर है। तेरा इंतेजार करता हूँ अब भी मगर ये वक्त भी बड़ा...

राजनीति बहुत गंदी चीज है।’पांच हजार साल पहले महाभारत के शकुनी काअपने भांजे दुर्योधन से कही गयी यह बात आज भी चरितार्थ होती है। महाभारत के राजनैतिक...