अध्याय-4 “परिस्थितियां चाहे जैसी हों व्यक्ति को हार नहीं माननी चाहिए,अपने सिद्धांत,पथ और लक्ष्य पर अडिग रहना चाहिए| हर वक्त अपने प्रयास को जारी रखना चाहिए .............” दादा जी की बातें अभी चल ही रही थी कि कुलश्रेष्ठ जी आकर बताते है कि चकरू चाचा की तबियत बहुत ख़राब है और उनके बचने की कोई चांस नहीं है | ब्यूटी पूछती है कि चकरू चाचा कौन हैं और उन्हें क्या हुआ है ? दादा जी बताते है कि वो जिंदगी की आखिरी सत्य को जीने जारहा है | कुलश्रेष्ठ जी टोकते है किआपसे छोटे हैं वो ? ब्यूटी के जिद पर कुलश्रेष्ठजी उसे चकरू के घर ले जाते हैं| रास्ते में ब्यूटी अपने पापा से पुनःपूछती है कि चकरू कौन हैं और दादाजी उनके बारे में इतनी रुखाई से क्यों बोले हैं ? तब वे बताते हैं कि चकरू चाचा पिताजी के चचरे-मौसेरे भाई हैं | चाचा राजनीति शास्त्र से स्नातक हैं अपने समय में यह एक बड़ी डिग्री हुआ करती थी | वे राजनीती में इंट्रेस्टेड थे और छात्र संघ का चुनाव भी लड़ने को तैयार थे लेकिन इस बात को लेकर घर में विवाद था हम सब संयुक्त परिवार में थे | पिता जी चाचा के पक्ष में थे लेकिन मेरे दादा,दादी इसके पक्ष में नहीं थे | पर्चादाखिला के दिन सुबह में चकरू चाचा और दादा में कहासुनी हिंसक रूप ले लिया | मेरी माँ बिच बचाव में गई लेकीन तैस में आये चाचा ने माँ को धक्का दे दिया जिससे उन्हें गंभीर चोट आगई इसी बीच किसी ने पुलिस को सूचना दे दिया जिसके वजह से वे चुनाव नहीं लड़ सके | कुछ दिनों बाद मेरी माँ का देहांत हो गया | चकरू चाचा पर केश चला और गैरइरादतन हत्या के जुर्म में जेल हो गई इस तरह से उनकी राजनितिक जीवन लगभग समाप्त हो गया | इस घटना के बाद राजनीती ने मेरे घर में एक विशेष रूप ले लिया शायद इसी वजह से मेरी माँ ने मरने से पहले हम दोनों भाइयो को राजनीती में भेजने की इच्छा व्यक्त की थी | लेकिन हम दोनों भाई कभी भी राजनीती में जाने की नहीं सोचते थे | पिताजी के जिद के आगे हम मजबूर थे, मेरी शादी कम उम्र में कर दी गई लेकीन परिस्थितियां अपने को फिर दुहरायी मै भी कम उम्र में पत्नी वियोग को झेला लेकिन मै अन्दर ही अन्दर टूट चूका था इसी लिए मै घर छोड़ कर भाग गया | हम दोनों भाइयों की असफलता से खिन्न पिताजी अब तुम्हे राजनीती में लाना चाहते हैं | ब्यूटी जब चकरू के घर पहुची तो वे स्वर्ग सिधार चुके थे | आज के दिन के घटनाक्रम ने शम्भू जी के दिमाग में चल रहे सभी विचारो को एक ही फ्रेम में ब्यूटी को समझा दिया | शाम को को ब्यूटी अपने दादा से चकरू दादा के दाह-संस्कार में न जाने की वजह पूछती है | दादा बताने से इनकार करते हैं तो ब्यूटी समझाती है कि भले ही आप उन्हें एक हत्यारा माने लेकिन जिस लक्ष्य के लिए आप अपना पूरा परिवार अपना पूरा जीवन गला दिया वह उन्ही से मिली हैऔर आप उनके इस योगदान को मत भूलिए | आज से अगले बारह दिन तक चलने वाले सभी कर्म-कांडों में सम्मिलित होंगे | यहीं से मेरे राजनितिक जीवन की सुरुवात होती है |
मिस ब्यूटी क्वीन 4
अध्याय-4 “परिस्थितियां चाहे जैसी हों व्यक्ति को हार नहीं माननी चाहिए,अपने सिद्धांत,पथ और लक्ष्य पर अडिग रहना चाहिए| हर वक्त अपने प्रयास को जारी रखना चाहिए .............” दादा जी की बातें अभी चल ही रही थी कि कुलश्रेष्ठ जी आकर बताते है कि चकरू चाचा की तबियत बहु…



