Saturday, 29 Aug 2026
novel

मिस ब्यूटी क्वीन 2

अध्याय- 2 https://uddgar.com/miss-beauty-queen-1/ बुढ़ापा वह बीमारी है जो आती है तो अपने साथ पूरा जीवन ले कर जाती है | यही हाल कुछ शम्भूशरण पाण्डेय जी का था | सुरुआती निश्चिंत जीवन, सही खान-पान और अच्छी दिनचर्या ने उनके शरीर को बेहद सही और स्वस्थ बना दिया था ल…

मिस ब्यूटी क्वीन 2

                   अध्याय- 2

https://uddgar.com/miss-beauty-queen-1/

  बुढ़ापा वह बीमारी है जो आती है तो अपने साथ पूरा जीवन ले कर जाती है | यही हाल कुछ शम्भूशरण पाण्डेय जी का था | सुरुआती निश्चिंत जीवन, सही खान-पान और अच्छी दिनचर्या ने उनके शरीर को बेहद सही और स्वस्थ बना दिया था लेकिन पत्नी का असमय देहांत, बेटों से अनबन और एकांत जीवन ने उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गलत असर डाल दिया था | सन्सकारी ब्राह्मण परिवार से होने के कारण उनके दीर्घायु के लिए विविध तरह के धार्मिक पूजन किये जाने लगे | उनके पास लोगों की चहलकदमी बढ़ने लगी लेकिन पाण्डेय जी की नजरें ब्यूटी को खोजती रहती थीं | वे सब से यही कहते कि  नतिनी आई है अब ठीक हो जाऊंगा और अब मर भी गया तो कोई गम नहीं |

        परिस्थितियां सकारात्मक मोड़ पर थीं| स्वास्थ्य सुधार हो रहा था | इसी बीच ब्यूटी ने एक व्हीलचेयर ऑनलाइन मंगा लिया | पाण्डेय जी तरेरती आँखों से प्रश्न किया तो ब्यूटी ने बताया की इस पर हम आपको पूरा गाँव घूमाएंगे तभी नजाने क्या होता है कि पाण्डेय जी उठ के बैठ जाते हैं और कहते हैं कि तूं मुझे अपना गाँव घुमाएगी या मै तुम्हे अपना गाँव घुमाऊंगा | एक खिलखिलाहट के साथ ब्यूटी कहती है कि हम अपना गाँव एक साथ घूमेंगे | दिन ढले हुए ज्यादे देर हो चुकी थी पाण्डेय जी के दवा का समय हो चूका था | अगले दिन उन्हें डॉक्टर के पास जाना था | कुछ देर बाद सभी नींद के आगोश में थे |

        अगली सुबह जब पाण्डेय जी डॉक्टर के पास से लौट रहे थे तो गाँव के बाहर गाड़ी रुकवाए और कहे कि अब मै गाड़ी से नहीं बल्कि व्हीलचेयर से घर जाऊंगा ख़ुशी-ख़ुशी सब उन्हें व्हीलचेयर पर बिठा दिए | व्हीलचेयर ब्यूटी पकडे हुए थी | धीरे-धीरे सब चलने लगे तभी पाण्डेय जी अपने दोनों बेटों के मुरझाये चेहरों पर देखे उन्होंने परिस्थिति को भांपते हुए कहा, “लोग झूठमूठ में दुःख पर आछेप लगाते हैं |” “क्या मतलब ?” ब्यूटी पूछती है | तभी कुलश्रेष्ठ जी कहते हैं, “मतलब ये है कि जब हमारे पास सुख शांति था तो उस समय हम सब अलग अलग थे और आज दुःख ने हमें एक पास कर दिया |” “परिस्थितिया बहुत ही शक्तिशाली होती है,वे विज्ञान के नियम को भी तोड़ देती हैं|” ब्रह्मानंद की बातों ने ब्यूटी को गंभीर कर दी थीं| सब घर पहुच चुके थे |

        दोपहर के तीन बजे होंगे, कुलश्रेष्ठजी और ब्रह्मानंदजी कहीं बाहर गए थे, ब्यूटी दादाजी के पास जाकर बैठ जाती है और पूछती है,“आप सब एक दुसरे को इतने अच्छे तरह से समझते हैं फिर मतभेद क्यों थे |”

 “समझना ही तो परेशानी थी |” दादा जी ने जवाब दिया |

 “मतलब ?” ब्यूटी झुन्झलायी|

 “ मतलब ये कि मेरी उनसे कुछ अपेक्षायें थी लेकिन उनकी कुछ और ही मंशा थीं |”

“ वो क्या थीं ?” ब्यूटी गंभीर होते हुए पूछी |

“वो हमारे पीढ़ियों की अधूरी इच्छा है, अगर तुम उसे पूरा करो तो मै बताऊँ |” दादाजी ने जवाब दिया | “तुम उसे पूरा  कर सकती हो |”दादाजी ने मनोबल बढाया |

“बताएं” ब्यूटी और भी गंभीर होते हुए बोली |

“मै चाहता हूँ कि हमारे वंश से कोई राजनीती में जाये, क्या तुम जाओगी ?” दादाजी ने प्रश्नवाचक जवाब दिया |

 “मै जाऊंगी लेकिन तरीका मेरा होगा |” ब्यूटी ने एकटुक जवाब दिया |

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Written by

Durgesh kumar