Saturday, 29 Aug 2026
novel

मिस ब्यूटी क्वीन 3

अध्याय-3 अगली सुबह ब्यूटी जब उठी तो मन मे प्रफुल्लता थी | उसे उगते सूरज की लालिमा में उत्त्साह दिखा | पंछियों की चहचहाहट में उसे प्रकृति की संगीत उद्गारित हो रही थी | कुछ दूर आगे चलने पर कनेल की शाखाओ पर लटकते सुनहले फूलों से उसे याद आया कि दादा आज कई दिनों स…

मिस ब्यूटी क्वीन 3
                   अध्याय-3
अगली सुबह ब्यूटी जब उठी तो मन मे प्रफुल्लता थी | उसे उगते सूरज की लालिमा में उत्त्साह दिखा | पंछियों की चहचहाहट में उसे प्रकृति की संगीत उद्गारित हो रही थी | कुछ दूर आगे चलने पर कनेल की शाखाओ पर लटकते सुनहले फूलों से उसे  याद आया कि दादा आज कई दिनों से पूजा नहीं किये हैं क्यों न कुछ कनेल पुष्प ले चलूँ और दादा से पूजा कराऊँ शायद उनके मन पर कुछ सकारात्मक प्रभाव पड़े | वह तुरंत पुष्पों को इक्कठा कर घर लौट जाती है |
घर लौटकर  वह अपने दादा को नहलाती है उनको अच्छे  से तैयार करती | दादा के जिद पर वह उन्हे पिला कपड़ा पहनाती है और उन्हे पूजा कक्ष में ले जाती है | दादाजी जब पीले पुष्पों को देखते हैं तो पूछते हैं, “ जानती हो आज कौन सा दिन है ?”
“नहीं”
“आज गुरुवार है|”
“तो फिर?”
“तुम्हारी दादी हर गुरुवार को व्रत रखती थीं | वो भगवान विष्णु की भक्त थी और हर गुरुवार को सारे सामन पीले रंग का ही उपयोग करती थीं|” फिर चौकते हुए ब्यूटी से पुछते हैं, “लेकिन तुम पीले पुष्प क्यों लायी,तुम्हे ये सब कैसे पता ?”
ब्यूटी मुस्कुराते हुए कहती है, “मुझे कुछ नहीं पता बस मै पुष्प देखी तो आपको पूजा कराने की इच्छा हुई और पुष्प लेते आई |”
“एक बात कहूँ?” दादा ने पूछा |
ब्यूटी ने संजीदगी से कहा, “ कहिये |”
दादाजी गंभीर होते हुए कहते हैं, “ईश्वर है या नहीं,उसका क्या अस्तित्व है मै नहीं जानता, मानव और ये प्रकृति ईश्वरीय रचना है या एक विकास का क्रमिक परिणाम है ये सब अध्ययनाधीन है लेकिन ईश्वर में विश्वास, उनके प्रति आस्था, उनकी पूजा हमें सकारात्मक उर्जा देती है, हममे उत्त्साह और प्रफुल्लता भरती है| इसलिए तुम हमेशा ईश्वर में आस्था और विश्वास रखना,उनकी मन से पूजा करना, हर परिस्थिति उन्हें याद करना | तुम्हे कभी कोई हानि नहीं होगी और हमेशा सफलता मिलेगी?”
ब्यूटी एक गंभीर मुस्कान के साथ कहती है, “मै ईश्वर मे विश्वास करती हूँ लेकिन मै उसकी टेस्ट लुंगी |”
“कैसा टेस्ट?”दादा डाँटते हुए पूछे |
तो ब्यूटी बोली“अगर वो मेरे दादाजी को जल्द से जल्द ठीक कर देंगे तो मै उनकी पूजा जीवन भर करुँगी | वैसे अब आपके दवा का समय हो गया है चलिए भोजन करिए और दवा लीजिए |”
दादाजी पूजा कक्ष से बाहर आते हुए बच्चों के तरह कहते हैं, “ब्यूटी बेटा मै आज व्रत रख लूँ ?”
“वो क्यों?”
“तुम्हारी दादी के याद में”
“नहीं चलिए भोजन और दवा लीजिये |”
दोनों का पूरा दिन यूं ही बातों में गुजरा शाम को ब्यूटी का तबियत ख़राब थी ,उसका चेहरा मुरझाया हुआ था और कमजोर महसूस कर रही थी शाम को उसकी हालत ख़राब देखते हुए दादाजी पूछते हैं, “क्या हुआ तबियत तो ठीक है?”
“हाँ सब ठीक है |” ब्यूटी बोली |
“खाना खाई हो ?”
“नहीं”
“क्यों?”
“व्रत हूँ |”
“क्यों?”
“दादी के याद में |”
“तूं अपनी जिद पूरा कर के ही मानेगी |”
“ये जिद नहीं है |”
“तो फिर क्या है ?”
“ईश्वर के प्रति अटूट आस्था और लक्ष्य के प्रति दृढ़ता |”
इसके बाद दादाजी के बताये हुए तरीके से हल्दी मिला दूध और  पीली रोटी खाकर सो जाती है |
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Written by

Durgesh kumar