प्रजातंत्र की रणभूमि मे, विगुल कभी बज सकता है । कौटिल्य के “शतरंज”मे, “गो”की नीति भी चल सकता है। वादों के प्रचार में, विवादों का प्रपंच चल...

ईमान और आराम

  • By DURGESH KUMAR SINGH
  • February 5, 2025

नौकरी मे ईमान और बिज़नेस मे आराम जिस दिन भूल गए तरक्की उसी दिन मिल जाएगी लेकिन राजनीति मे ये दोनों भूलने पर ही कुछ भी संभव...

मेरे कहानियों मे तूं बहुत मशहूर है। सुना है तूं भी मेरे इश्क मे मजबूर है। तेरा इंतेजार करता हूँ अब भी मगर ये वक्त भी बड़ा...

जीत हो या हार हो

  • By DURGESH KUMAR SINGH
  • June 5, 2024

जीत हो या हार हो भ्रस्टाचार पर प्रहार हो चक्र समय का घूम रहा स्वल्प का संहार हो देवस्थापना हो चुका अब देवत्व का प्रसार हो कुचक्र...

राजनीति बहुत गंदी चीज है।’पांच हजार साल पहले महाभारत के शकुनी काअपने भांजे दुर्योधन से कही गयी यह बात आज भी चरितार्थ होती है। महाभारत के राजनैतिक...