प्रजातंत्र की रणभूमि मे, विगुल कभी बज सकता है । कौटिल्य के “शतरंज”मे, “गो”की नीति भी चल सकता है। वादों के प्रचार में, विवादों का प्रपंच चल...

ईमान और आराम

  • By DURGESH KUMAR SINGH
  • February 5, 2025

नौकरी मे ईमान और बिज़नेस मे आराम जिस दिन भूल गए तरक्की उसी दिन मिल जाएगी लेकिन राजनीति मे ये दोनों भूलने पर ही कुछ भी संभव...

आजाओ मिलने

  • By DURGESH KUMAR SINGH
  • January 13, 2025

मेरे कहानियों मे तूं बहुत मशहूर है। सुना है तूं भी मेरे इश्क मे मजबूर है। तेरा इंतेजार करता हूँ अब भी मगर ये वक्त भी बड़ा...