📅 15 Oct 2026“साहित्य समाज का दर्पण है, और विचार बदलाव की शुरुआत।”
सुविचार

उत्कंठा

वैचारिक रूप मे जिंदा रहने की आकांछा हमे महान बनाती है जबकि शारीरिक रूप से अमर होने की उत्कंठा हमे शैतान बनाती है।

उत्कंठा
वैचारिक रूप मे जिंदा रहने की आकांछा हमे महान बनाती है जबकि शारीरिक रूप से अमर होने की उत्कंठा हमे शैतान बनाती है।
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Written by

DURGESH KUMAR SINGH

“मन के भावों की उत्कृष्ट उद्गार ही रचनात्मकता है।”