📅 16 Oct 2026“साहित्य समाज का दर्पण है, और विचार बदलाव की शुरुआत।”
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द फेस बिहाइंड ब्यूटी

https://www.youtube.com/watch?v=LlLuakAHFNc आज बस में जाते हुए मुझे वह मिली,मैं सहमा सा उसके पास गया और हाय कहकर उसके पास बैठ गया चेहरा पूरा याद था। आज भी वह बेहद सुंदर,शालीन एवं हंसमुख थी। नाम मैं भूल चुका था और भृकुटी पर जोर देने पर भी याद नहीं आया तो सोचा…

द फेस बिहाइंड ब्यूटी
          https://www.youtube.com/watch?v=LlLuakAHFNc                                                                          आज बस में जाते हुए मुझे वह मिली,मैं सहमा सा उसके पास गया और हाय कहकर उसके पास बैठ गया चेहरा पूरा याद था। आज भी वह बेहद सुंदर,शालीन एवं हंसमुख थी। नाम मैं भूल चुका था और भृकुटी पर जोर देने पर भी याद नहीं आया तो सोचा उससे पूछ लूं अभी सोच ही रहा था कि मेरे ज़बान से निकला-शैल आप क्या कर रही हो? थोड़ी देर रुक कर उसने हल्की सी मुस्कान के साथ कहा- तुम्हें मेरा नाम याद है? - हां-हां क्यों नहीं लेकिन शायद तुम मेरा नाम भूल गयी हो ? -हां वो बात ये है कि .... -बात काटते हुए मै बोला अरे अब मान भी जाओ कि तुम मेरा नाम भूल गयी हो,वैसे देवांग नाम है मेरा और तुम सब कोड वर्ड में देव कहती थीं। - काम के चक्कर में मैं अपने पति तक का नाम भूल जाती हूं,तुम तो 10 साल बाद मिले हो - ठहाके लगाते हुए मैंने स्पष्ट किया 10 साल नहीं पूरे 17 साल हो गए मिले हुए। - हल्की सी मुस्कान के साथ वो बोली तुम्हारी राजनीति का क्या हाल है? मैंने भी जवाब दिया- तुम्हारे चीर परिचित सवाल "क्या करोगे" से "क्या कर रहे हो" का सफर तय कर रहा हूं । - बात बनाने की आदत तुम्हारी गई नहीं ? - तुम कौन सा सीधा जवाब देती हो? तभी बस स्टॉप पर बस रुकी और वह भीड़ में कहीं चली गई । आज भी उसकी सुंदरता के पीछे 17 साल पुराना वह मासूम सा चेहरा बिना किसी बदलाव के जिंदा था।https://www.youtube.com/watch?v=LlLuakAHFNc
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Written by

Durgesh Kumar Singh

“मन के भावों की उत्कृष्ट उद्गार ही रचनात्मकता है।”